मैंने आगाज़ में अंजाम की बातें की हैं गर समझ लो तो बड़े काम की बातें की हैं सुबहे रोशन की कभी शाम की बातें की हैं इस तरह गर्दिश-ऐ-अय्याम की बातें की हैं वही जज्बा जो मोहब्बत का अमीं होता है हाँ उसी जज
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