हालात से नाउम्मीद होती ज़िंदगी!

Posted on November 20th, 2008
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आज अपने ब्लॉग पर चंद
पंक्तियां मेरे दोस्त रवीश
रंजन शुक्ला की कलम से।
दिल्ली में रह कर
पत्रकारिता कर रहे रवीश भी
मेरी तरह एक छोटे शहर से
हैं। रवीश की ख़ासियत ये है
कि वे एक बेहद संवदेनशील
इंसान हैं और अपने आस-पास
होनेवाले तमाम वाकयों से
खुद को अलग नहीं रख पाते।
कुछ रोज़ पहले रवीश को एक
वाकये ने बुरी तरह झकझोर कर
रख

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